डॉ. एस. आर. रंगनाथन
डॉ. शियाली राममृत रंगनाथन, जिन्हें भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक कहा जाता है, का जन्म 9 अगस्त 1892 को तमिलनाडु में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत गणित के प्राध्यापक के रूप में की, लेकिन बाद में उनका रुझान पुस्तकालय विज्ञान की ओर हो गया। वर्ष 1924 में वे मद्रास विश्वविद्यालय के पहले पुस्तकालयाध्यक्ष बने और आधुनिक पुस्तकालय पद्धतियाँ सीखने के लिए लंदन गए।
डॉ. रंगनाथन का पुस्तकालय विज्ञान में महान योगदान है। उन्होंने पुस्तकालय विज्ञान के पाँच नियम दिए: (1) पुस्तकें उपयोग के लिए होती हैं, (2) प्रत्येक पाठक को उसकी पुस्तक मिले, (3) प्रत्येक पुस्तक का अपना पाठक हो, (4) पाठक का समय बचाना चाहिए, और (5) पुस्तकालय एक बढ़ता हुआ जीव है। ये नियम आज भी विश्वभर के पुस्तकालयों का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कोलन वर्गीकरण पद्धति भी बनाई, जिससे पुस्तकों का वैज्ञानिक ढंग से वर्गीकरण संभव हुआ।
वे मानते थे कि शिक्षा और सामाजिक प्रगति के लिए पुस्तकालय आवश्यक हैं। उनके प्रयासों से भारत में सार्वजनिक और शैक्षणिक पुस्तकालयों का विकास हुआ। वर्ष 1965 में उन्हें राष्ट्रीय अनुसंधान प्रोफेसर (पुस्तकालय विज्ञान) की उपाधि प्रदान की गई।
डॉ. रंगनाथन का निधन 1972 में हुआ, लेकिन उनका कार्य आज भी प्रेरणा देता है। उनकी जयंती, 12 अगस्त, हर वर्ष राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के रूप में मनाई जाती है। निस्संदेह, वे एक महान विद्वान थे जिन्होंने अपना जीवन ज्ञान और पुस्तकालयों को समर्पित कर दिया।
No comments:
Post a Comment